शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन महाशुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,सामग्री लिस्ट ओर मंत्र
शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन महाशुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,सामग्री लिस्ट ओर मंत्र

शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन महाशुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,सामग्री लिस्ट ओर मंत्र
सुहागिन इस विधि से करें पूजन, बता रहे हैं,भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले
हापुड़। शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन महाशुभ संयोग मुहूर्त में 16 मई को मनाया जाएगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि ज्येष्ठ महीने में शनिवार, अमावस्या, सौभाग्य व शोभन योग का संयोग होने से इस दिन किया गए व्रत पूजन दान का पुण्यफल हज़ार गुना अधिक प्राप्त होगा। धर्मग्रंथो के अनुसार – शनौ अमायां शनिजेः प्रतिष्ठा शुभदा भवेत्। त्रिकयोगे महापुण्यं कोटियज्ञफलं लभेत्॥
अर्थात इस दिन शनि प्रतिष्ठा पूजन स्थापना से भी कोटि महापुण्य प्राप्त होगा शनिदेव के गुरु भैरव जी है इस दिन भैरव जी के पूजा से भी भगवान शनि प्रसन्न होते है। अमावस्या तिथि सुबह 5.11 बजे से देर रात्रि 1.30 तक रहेगा शनि पूजन विशेष समय अभिजीत मुहूर्त 11.48 बजे से 12.42 बजेतक तथा प्रदोष काल के साथ रात्रि तक विशेष फलदायी रहेगा। इस दिन शनिदेव को सरसों का तेल, काला कपड़ा, उड़द व उड़द से बने हुए पदार्थ, काला तिल, नीला पुष्प अवश्य चढ़ाना चाहिए साथ ही सरसों के तेल का दीपक भी जलाना चाहिए, गरीब को भोजन, वस्त्र आदि का दान दे इससे शनिदेव प्रसन्न होते है शनि की साढ़ेसाती व ढईया के पीड़ा से शान्ति व शनि महादशा, अंतर्दशा से लाभ होता है। पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि वट सावित्री व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। मध्यान्ह व्यापिनी पर्व होने से वटवृक्ष पूजन का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त व स्थिर लग्न में 11.48 बजे से 1.56 तक अधिक शुभ रहेगा वटवृक्ष के बारेए पद्म पुराण श्लोक के अनुसार ” मूले ब्रह्मा त्वचि विष्णुः शाखायां शंकरः स्वयम् । वटवृक्षस्ततो पूज्यः स एव पुरुषोत्तमः ॥ अर्थात वटवृक्ष के जड़ में सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी, छाल या तने में भगवान पालनकर्ता विष्णु जी शाखाओं में भाग्य बनाने वाले भगवान शिव का वास होता है। अतः वट सावित्री पूजन वटवृक्ष के पास जाकर ही करना चाहिए और उसकी शाखा या टहनी तोड़ने या तोड़कर घर लाने से पुण्य के स्थान पर पाप का भागी बनता है। वट पूजन करते समय निम्लिखित मंत्र पढ़ते हुए जल चढ़ाना चाहिए “वट सिंचामि ते मूलं, तोयैः अमृतोपमैः। येन त्वं वृद्धिमाप्नोषि,शाखा-पल्लव-संयुतः ॥ तथा वट वृक्ष कि 7 या 108 बार कलावा या कच्चा सूत बांधते हुए परिक्रमा करना चाहिए, विधिवत पूजन के बाद स्कंदपुराण में वर्णित सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़कर या सुनकर आरती करना चाहिए इससे स्त्रियां सौभाग्यवती रहती है पति की आयु लम्बी होती है और सुख संपत्ति भी बढ़ता है। यही हेडलाइन ओर सब हेडलाइन के साथ स्टेप बाई स्टेप चाहिए यही पूरी खबर
शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन महाशुभ संयोग
जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री लिस्ट और मंत्र
सुहागिन इस विधि से करें पूजन, बता रहे हैं भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले
हापुड़। शनि जयंती एवं वटसावित्री व्रत पूजन का महाशुभ संयोग 16 मई को मनाया जाएगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि ज्येष्ठ मास में शनिवार, अमावस्या, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बनने से इस दिन किए गए व्रत, पूजन और दान का पुण्यफल हजार गुना अधिक प्राप्त होता है।
धर्मग्रंथों के अनुसार—
“शनौ अमायां शनिजेः प्रतिष्ठा शुभदा भवेत्।
त्रिकयोगे महापुण्यं कोटियज्ञफलं लभेत्॥”
अर्थात इस दिन शनि प्रतिष्ठा एवं पूजन करने से करोड़ों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
पंडित केसी पाण्डेय ने बताया कि शनिदेव के गुरु भगवान भैरव हैं, इसलिए इस दिन भैरव पूजन करने से भी शनिदेव विशेष प्रसन्न होते हैं।
अमावस्या तिथि एवं शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: प्रातः 5:11 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: देर रात्रि 1:30 बजे तक
शनि पूजन का विशेष शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक
प्रदोष काल: सायंकाल से रात्रि तक विशेष फलदायी
वट सावित्री पूजन शुभ मुहूर्त
अभिजीत एवं स्थिर लग्न मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 1:56 बजे तक
शनि जयंती पूजा सामग्री लिस्ट
आवश्यक सामग्री
सरसों का तेल
काला कपड़ा
उड़द दाल
उड़द से बने पदार्थ
काला तिल
नीले पुष्प
सरसों तेल का दीपक
धूप, अगरबत्ती
फूल-माला
प्रसाद
भैरव जी के लिए नारियल व सिंदूर
शनि जयंती पूजन विधि (स्टेप बाय स्टेप)
चरण 1: स्नान एवं संकल्प
सुबह स्नान कर स्वच्छ काले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
चरण 2: शनिदेव की स्थापना
शनिदेव की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
चरण 3: तेल अर्पित करें
शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें तथा तेल का दीपक जलाएं।
चरण 4: पूजन सामग्री चढ़ाएं
काला तिल, उड़द, नीले फूल और काला वस्त्र अर्पित करें।
चरण 5: मंत्र जाप करें
शनि मंत्र
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
कम से कम 108 बार जाप करें।
चरण 6: भैरव पूजन करें
भैरव बाबा को सिंदूर, नारियल और तेल अर्पित करें।
चरण 7: दान करें
गरीबों को भोजन, वस्त्र और तिल-उड़द का दान करें।
लाभ
शनि साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत
शनि महादशा-अंतर्दशा में लाभ
बाधाओं और कष्टों में कमी
वट सावित्री व्रत का महत्व
पंडित केसी पाण्डेय ने बताया कि वट सावित्री व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। पद्म पुराण के अनुसार—
“मूले ब्रह्मा त्वचि विष्णुः शाखायां शंकरः स्वयम्।
वटवृक्षस्ततो पूज्यः स एव पुरुषोत्तमः॥”
अर्थात वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्माजी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसलिए वट वृक्ष का पूजन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
उन्होंने कहा कि वट वृक्ष की शाखा तोड़ना या घर लाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। पूजन सदैव वृक्ष के पास जाकर ही करना चाहिए।
वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री लिस्ट
आवश्यक सामग्री
जल से भरा लोटा
रोली, अक्षत
कच्चा सूत या कलावा
फूल एवं माला
भीगा चना
फल एवं मिठाई
धूप-दीप
सुहाग सामग्री
पान, सुपारी
सावित्री-सत्यवान कथा पुस्तक
वट सावित्री पूजन विधि (स्टेप बाय स्टेप)
चरण 1: व्रत एवं श्रृंगार
सुहागिन महिलाएं प्रातः स्नान कर सोलह श्रृंगार करें और व्रत का संकल्प लें।
चरण 2: वट वृक्ष के पास जाएं
पूजन के लिए वट वृक्ष के नीचे जाएं।
चरण 3: जल अर्पित करें
यह मंत्र बोलते हुए वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं—
“वट सिंचामि ते मूलं, तोयैरमृतोपमैः।
येन त्वं वृद्धिमाप्नोषि, शाखा-पल्लव-संयुतः॥”
चरण 4: सूत बांधें
वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या कलावा बांधें।
चरण 5: कथा सुनें
स्कंद पुराण में वर्णित सावित्री-सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें।
चरण 6: आरती करें
पूजन के बाद आरती कर पति की दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करें।
वट सावित्री व्रत का फल
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
पति की दीर्घायु
परिवार में सुख-समृद्धि
वैवाहिक जीवन में खुशहाली
संतान एवं धन वृद्धि का आशीर्वाद
पंडित केसी पाण्डेय का संदेश

पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि इस बार शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का अद्भुत संयोग बनने से यह दिन अत्यंत पुण्यदायी रहेगा। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया पूजन जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करेगा।



