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सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में विश्व सनस्क्रीन दिवस पर जागरूकता अभियान आयोजित

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में विश्व सनस्क्रीन दिवस पर जागरूकता अभियान आयोजित

विश्व सनस्क्रीन दिवस पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ मे जागरूकता अभियान आयोजित

 

त्वचा संरक्षण एवं निवारक स्वास्थ्य देखभाल को लेकर लोगों को किया जागरूक

 

विशेषज्ञों ने बताया—सनस्क्रीन केवल सौंदर्य प्रसाधन नहीं, बल्कि त्वचा सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम

 

पिलखुवा। (मोहित उपाध्याय) विश्व सनस्क्रीन दिवस के अवसर पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के त्वचा रोग विभाग द्वारा एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा त्वचा सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन के नियमित उपयोग को बढ़ावा देना था। यह आयोजन शैक्षणिक गरिमा, सामाजिक जिम्मेदारी एवं स्वास्थ्य जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बना।

 

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. दीप्ति सक्सेना, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग विभाग, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान विभाग के संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स, इंटर्न्स, मेडिकल विद्यार्थियों तथा स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

 

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. जे. रामचंद्रन, संस्थापक एवं चेयरमैन, सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस तथा रम्या रामचंद्रन, उपाध्यक्ष, सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उनकी दूरदर्शी सोच ने संस्थान में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं एवं जन-जागरूकता अभियानों को नई दिशा प्रदान की है।

इसके अतिरिक्त संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इनमें डॉ. बरखा गुप्ता, प्राचार्य; डॉ. मेजर जनरल सी.एस. आहलूवालिया, मेडिकल सुपरिटेंडेंट; ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, सीनियर एडवाइज़र; एन. वर्धराजन, जनरल मैनेजर तथा रघुवर दत्त, निदेशक शामिल रहे। सभी अधिकारियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।

 

जागरूकता अभियान का शुभारंभ

 

कार्यक्रम की शुरुआत अस्पताल परिसर में जागरूकता गतिविधियों के साथ की गई। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों और उनके परिजनों को सूर्य की तेज किरणों से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। लोगों को बताया गया कि लंबे समय तक बिना सुरक्षा के धूप में रहने से त्वचा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

विशेषज्ञों ने समझाया कि अत्यधिक धूप के कारण त्वचा में समय से पहले झुर्रियां आना, टैनिंग, पिगमेंटेशन, सनबर्न, त्वचा का रंग असमान होना तथा फोटोसेंसिटिविटी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा लंबे समय तक यूवी किरणों के संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

 

विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य परामर्श

 

कार्यक्रम के दौरान त्वचा रोग विशेषज्ञों द्वारा इंटरैक्टिव काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में लोगों को त्वचा की देखभाल के विभिन्न उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि सनस्क्रीन केवल महिलाओं या सौंदर्य देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति के लिए आवश्यक त्वचा सुरक्षा उपाय है।

इस अवसर पर डॉ. दीप्ति सक्सेना ने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां वर्षभर तेज धूप रहती है, वहां त्वचा सुरक्षा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनस्क्रीन त्वचा को फोटो डैमेज, टैनिंग और पर्यावरणीय प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि घर से बाहर निकलने से लगभग 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए तथा लंबे समय तक धूप में रहने की स्थिति में हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर दोबारा सनस्क्रीन लगाना चाहिए।

 

सही सनस्क्रीन चयन की जानकारी

 

कार्यक्रम में लोगों को सही एसपीएफ (SPF) वाले सनस्क्रीन का चयन करने की जानकारी भी दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में एसपीएफ 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन उपयोग करना बेहतर माना जाता है। साथ ही यह भी बताया गया कि त्वचा के प्रकार के अनुसार उपयुक्त सनस्क्रीन का चयन करना चाहिए।

विशेषज्ञों ने यह भ्रांति भी दूर की कि बादलों वाले मौसम या सर्दियों में सनस्क्रीन की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि यूवी किरणें हर मौसम में त्वचा को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए सनस्क्रीन का उपयोग नियमित रूप से किया जाना चाहिए।

 

निःशुल्क सनस्क्रीन वितरण

 

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए विशेष सनस्क्रीन वितरण अभियान भी चलाया गया। इस दौरान लोगों को निःशुल्क सनस्क्रीन सैंपल वितरित किए गए ताकि वे इसके महत्व को समझें और इसे अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें।

लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई लोगों ने चिकित्सकों से व्यक्तिगत त्वचा समस्याओं को लेकर परामर्श भी लिया।

 

सूर्य से बचाव के समग्र उपायों पर जोर

 

कार्यक्रम में केवल सनस्क्रीन उपयोग तक ही सीमित न रहकर लोगों को सूर्य से बचाव के अन्य उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने सलाह दी कि तेज धूप में बाहर निकलते समय फुल स्लीव कपड़े पहनें, धूप का चश्मा लगाएं तथा टोपी या छाते का उपयोग करें।

विशेषज्ञों ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अत्यधिक धूप में जाने से बचने की सलाह दी। इसके अलावा लोगों को पर्याप्त पानी पीने एवं त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।

 

जागरूकता सामग्री का वितरण

 

कार्यक्रम के दौरान त्वचा सुरक्षा से संबंधित जागरूकता सामग्री, पंपलेट एवं जानकारीपूर्ण संदेश भी वितरित किए गए। इन सामग्रियों में सूर्य की किरणों से बचाव, त्वचा की दैनिक देखभाल तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने संबंधी सुझाव दिए गए थे।

मेडिकल विद्यार्थियों एवं रेजिडेंट्स ने लोगों को व्यक्तिगत रूप से जागरूक करते हुए त्वचा रोगों की रोकथाम के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर गंभीर त्वचा समस्याओं से बचा जा सकता है।

 

सामुदायिक स्वास्थ्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता

 

यह आयोजन सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता, निवारक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहता है, जिनका उद्देश्य समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के समापन पर त्वचा रोग विभाग द्वारा सभी संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। विभाग ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाई जा सके।

विश्व सनस्क्रीन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल लोगों को त्वचा सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में सफल रहा, बल्कि समाज में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को भी प्रभावी ढंग से स्थापित करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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